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सोमवार, 22 मार्च 2021

A Day of Friendship

 / एक दिन दोस्ती का

भाग-3

अब तक आपने पढा:-

कि मानव और मनन आपस में मिलते हैं। मनन एक  E-Shop  चलाता हैं और  Private Tuition  पढाता हैं। मानव फिलहाल बेरोजगार हैं। दोनों की जान-पहचान होती हैं। फिर मनन श्रुति से मिलता हैं। श्रुति उसे अपनी कहानी बताती हैं। मनन उसे  Help करने  का  Promise करता है। और अपने परिवार से मिलवाता हैं। फिर मनन श्रुति को मानव से मिलाने ले जाता हैं। जिससे वे दोनों मिलकर श्रुति की मदद कर सके।

अब आगे:- 

Restaurant Outside 
Credit- dreams time


श्रुति और मनन एक  Restaurant  में पहुँचते हैं।  अन्दर जाकर वे एक टेबल पर बैठते हैं जो मनन ने पहले से ही बुक कर रखी थी।  थोडी देर में मानव भी वहाँ आता हैं। मनन, मानव और श्रुति को एक-दूसरे से मिलवाता हैं। मानव को देखते ही श्रुति  Surprise  हो जाती हैं। 5.6"  Height, Smart, Dashing, Fit & Slim, Well Dressed. वैसे मनन भी दिखने में  Smart  और  Dashing  था। लेकिन शायद  Tension  में श्रुति ने नोटिस नहीं किया हो।  श्रुति की नजरें मानव से हट ही नहीं रही थी। तभी मनन ने चुटकी बजा कर श्रुति का ध्यान भंग किया। मनन:- क्या हुआ ! कहाँ खो गई ? श्रुति:- कुछ नहीं। 

Restaurant Inside 
Credit- dreams time


 तीनों बैठते हैं। तभी वेटर आता हैं। तीनों काॅफी और स्नैक्स का ऑर्डर  देते हैं। ऑर्डर लेकर वेटर चला जाता हैं। मनन मानव को श्रुति के बारे में बताता हैं। और कहता हैं कि कुछ Solution  हो तो बताओ। मानव:- सबसे पहले तो  Thanks  कि हम आज ही मिले हैं और तुमने मुझे अपना दोस्त समझकर बुलाया। मनन:-  Thanks  की कोई बात नहीं। श्रुति और मैं भी आज ही मिले हैं। और फिर दो लोग मिल कर सोचेंगे तो  Solution  जल्दी और आसानी से निकल आयेगा। मानव:- ये भी ठीक है। श्रुति दोनों की बातें ध्यान से सुन रही थी। तभी वेटर काॅफी और स्नैक्स लेकर आता है। तीनों काॅफी पीने लगते हैं।

मानव:- श्रुति जाॅब की दिक्कत नहीं है। तुमने  Graduation  कर रखा है और तुम  MBBS  भी कर रही हो। तो जाॅब तो आसानी से लग जायेगी। रहा सवाल रहने का तो तुम  As a Paying Guest  रह सकती हो। मनन:-  हाँ पर ऐसी जगह जहाँ लोग अच्छे और जानकार हो। मानव:-   ऐसी एक जगह हैं। एक बुजुर्ग दंपति है। जिनके यहाँ श्रुति  As a Paying Guest  रह सकती है। वैसे श्रुति तुम्हारे यहाँ भी रह सकती है।  As a Paying Guest.  तुम अच्छे भी हो और जानकार भी। वैसे भी तुम अपनी पत्नी और भाभी के साथ रहते हो तो कोई दिक्कत भी नहीं होगी। मनन:-  ओ, Hello! मेरी शादी नहीं हुई है। अभी तक। मानव:- तो सुबह फिर वो। वो मेरी भाभी की शादीशुदा बहन हैं। और हमारे साथ ही रहती हैं। मैं और दीक्षा बचपन से ही अच्छे दोस्त हैं। 

Credit- Story blocks 

तभी श्रुति कहती हैं!  नहीं मैं तुम्हें और ज्यादा परेशान नहीं करना चाहती। मैं उन  Couple  के यहाँ ही  Paying Guest  रह लूंगी। वैसे भी तुम दोनों पहले ही मेरी बहुत मदद कर रहे हो। Both of you, Thanks for Everything! लेकिन  Don't mind!  मनन मुझे भी लगा कि दीक्षा तुम्हारी  Wife  हैं। वैसे कब से सिर्फ हम मेरे बारे में ही बात कर रहे है। मेरे बारे में तुम दोनों सब जान गये। लेकिन तुम दोनों के बारे तो मुझे कुछ पता ही नहीं। पहले तुम्हारे बारे में बात करते हैं। चलो अब तुम दोनों अपने बारे में बताओ। मानव:- क्योंकि हम सब मनन की वजह से मिले हैं। तो पहले मनन से ही शुरू करते है। हाँ तो मनन शुरू हो जाओ। 

Village View 

मनन:- हम पास ही के गाँव से हैं। गाँव में खेती-बाडी हैं। जिसे मम्मी-पापा ने अपनी देखरेख में बँटाई पे दे रखा हैं। हम दो भाई हैं। भैया एक सरकारी कृषि वैज्ञानिक हैं। मैंने  Commerce  से  Graduation  किया है। भाभी और दीक्षा के पति अजय गाँव में हमारे पडौसी हैं। हम सब बचपन से ही साथ हैं। हमारी स्कूल और कालेज की पढाई भी साथ ही हुई हैं। भैया-भाभी की Graduation Complete   हुई तब मैं अजय और दीक्षा 1st Year  में थे।

Village University 

 भैया-भाभी और अजय-दीक्षा की शादी बचपन से ही तय थी और शुरू से ही वे एक-दूसरे को पसंद भी करते थे। तो Graduation  के बाद घरवालों ने भैया-भाभी की शादी कर दी। शादी के 6 महीने बाद भैया आगे Agriculture Science  में  M.Sc. और फिर  P.H.D. की पढाई के लिए दूसरे शहर में रहने लगे। वे हर साल छुट्टियों में घर आते थे।

Marriage   

हम तीनों भी अपनी  Study  हो  Busy  गये। और  Graduation  के बाद अजय और दीक्षा की भी शादी हो गई। और श्याम भी 2 साल का हो गया था। शादी के 2 महीने बाद ही अजय की एक प्राइवेट कम्पनी में जाॅब लग गई। जिसके कारण अजय अकसर ट्यूर पर ही रहता था। अजय अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। ऐसे में तीनों घरों का ख्याल मुझे ही रखना था। मैं ट्यूशन लेने लगा और खेती-बाडी में पापा का हाथ बँटाने लगा। करीब सालभर बाद मुझे मेरे एक दोस्त का  Offer  आया। वो  Higher Studies के लिए Abroad  जा रहा था। वो अपनी E-Shop  सेल करना चाहता था। मैं भी कोई काम देख रहा था। तो मैंने उससे यह शाॅप खरीद ली। जो अभी मेरे पास है। शुरू में मैं गाँव से अप-डाउन करता था। फिर एक दिन जब अक्षर करीब 5.6 महीने का था। तब एक दिन उसकी तबीयत अचानक काफी बिगड गयी। गाँव में इलाज नहीं हुआ तब हमने उसे यहाँ शहर में डाॅ0 को दिखाया। उसके लीवर में प्राॅब्लम थी। 

Doctor Checkup 


लगातार 6 महीने तक उसका इलाज चला। तब जाकर वो पूरी तरह से ठीक हो पाया। लेकिन रोज गाँव से अप-डाउन संभव नहीं था। तो हमें यहाँ शिफ्ट होना पडा। तब से ही भाभी दीक्षा और मैं यहाँ रह रहें है। 2 साल पहले भैया की  Government Job  लगी है। अजय भी  अब मैनेजर बन गया है। लेकिन वे दोनों काम की वजह से अकसर ट्यूर पर ही रहते हैं। गाँव में हम सब के माता-पिता एक परिवार की तरह रहते हैं। खेती भी संयुक्त रूप से बटाई पर दे रखी है। हम सब गाँव जाते रहते है। 

Shifted City house 


क्रमशः- 

आगे की कहानी में हम जानेंगे ! मनन की कहानी में कोई Twist है क्या?  और मानव की कहानी क्या है? श्रुति की मदद के लिए मानव और मनन क्या करते है। इन तीनों का  Relationship  आगे क्या रहता है?


To Read Part 1st:-                      






To Read Part 2nd:-



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शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

BACHAPAN-A Feeling and Struggle

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                                                                        बचपन

                        भाग-2

अब तक आपने पढा:-

                                 नित्या का जन्म कलकत्ता के एक रईस परिवार हुआ था। बचपन से ही नित्या थोडी शरारती काफी समझदार घर-मोहल्ले में सबकी लाडली थी। लेकिन एक दिन छोटी सी भूल पर उसके पापा ने उसे थप्पड जड दिया। उसकी दादी ने उसे बचाया। दो दिन बीमार रहने के बाद नित्या फिर वही थी। हँसती-खेलती। नित्या के पापा शहर के बडे रईसों में शामिल थे। लेकिन उसके पापा अपने कारोबार और घर-परिवार के प्रति लापरवाह थे। जिसका फायदा उठा कर उसके दादा और ताऊ अपनी बुरी संगत के कारण सारा कारोबार जुए में गंवा दिया। जिसके कारण नित्या के परिवार को अपना शहर कलकत्ता छोडना पडा। और उसका पूरा परिवार कोटा राजस्थान आकर बस गया।

अब आगे:-

House with Shop at Corner
         नित्या का परिवार को किराये पर घर तो मिल गया। लेकिन अब समस्या थी परिवार के पालन-पोषण की। नित्या के पापा ने मकान के ही एक कमरे में किराने की दुकान खोल ली  जिसका दरवाजा रोड. की तरफ खुलता था। उसके दोंनों ताऊ फल का व्यापार शुरू कर दिया। वे दोंनों अब नित्या के पापा से अलग रहने लगे। नित्या के दादा-दादी उनके साथ ही रहते थे। नित्या के पापा की दुकान धीरे-2 चलने लगी। एक दिन नित्या के छोटे फूफा जी घर आये। नित्या झट से गोद में जा बैठी। घर की सुधरी स्थिति से वे खुश थे।  नित्या से स्कूल के बारे पूछने पर उनके पिता ने ना में जवाब दिया।क्योंकि वे लडकियों की शिक्षा के पक्ष में नहीं थे |

Updates

                    समझाने पर भी नही माने तब नित्या के फूफा जी ने अपने खर्च पर उनका दाखिला घर के पास ही के सरकारी Girls  स्कूल में करा दिया। और नित्या के पिता को सख्त हिदायत दी कि वे उनकी शिक्षा मेें कोई अडचन न आने दें। इस तरह उसकी शिक्षा आरम्भ हुई।कुछ दिन बाद फूूफा जी वापस लौट गये। अब घर के बाहर की दुनिया से रुबरु हुई। स्कूल में नये दोस्त मिले व आस-पडोस के लोगों से जान-पहचान हुई। उसका बचपन  फिर से खिलखिलाने लगा था। पढना उसे बहुत अच्छा लगता था और वह होशियार भी थी । इसलिए एक बार पढने पर ही उसे सब याद हो जाता था। उसकी समझदारी और Sharp Mind  ने स्कूल की सभी शिक्षिकाओं का दिल जीत लिया था।

Reading 
Happy childhood With Friends

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                   साल भर तक सब कुछ सही चलता रहा। लेकिन एक दिन अचानक ही नित्या के पिता काफी बीमार हो गये। डाॅ0 को दिखाया और सभी टेस्ट भी हुए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। धीरे-2 उनका स्वास्थ्य बिगडता ही जा रहा था। दुकान बंद रहने लगी। व्यापार ठप्प पड गया। 6 महीने में ही दुकान का सारा सामान घर के राशन में पूरा हो गया। मकान का किराया भी बाकी था। जमा पूँजी दवा व घर के अन्य खचा› से कम होने लगी। आर्थिक स्थिति बिगडने लगी थी। हाँलाकि नित्या का स्कूल जारी था। क्योंकि उसकी फीस का खर्च, उसके फूफा जी वहन कर रहे थे। इसलिये घर में किसी ने बाधा उत्पन्न नहीं की।


Negotiate for Rent
           एक दिन मकान मालिक किराये का तकादा करने आया। लेकिन उनकी स्थिति देखकर वो कुछ नही बोला। तब नित्या के पिता ने कहा- क्षमा करें। अभी हमारी स्थिति थोडी खराब हैं। मैं काफी बीमार रहता हँू। व्यापार भी पूरी तरह ठप्प हो गया है। ठीक होने पर मैं आपका पूरा किराया चुका दूगाँ। आपने ठीक ही कहा था। यहाँ वाकई में कोई जिन्न रहता हैं। देखिये हमारी क्या दशा हो गई। तब मकान मालिक बोला- कोई बात नहीैं। देखिये- आप चिन्ता मत किजिये। जीवन में उतार-चढाव तो आते रहते हैं। और रही बात जिन्न की तोए ऐसा कुछ नहीं हैं।


  
New House
दरअसल- बात यह हैं। कि यह हमारा पुश्तैनी मकान हैं। पहले हमारा पूरा परिवार साथ ही रहता था। बाद में सब अलग-2 रहने लगे। तब यह मकान मेरे पिताजी के हिस्से में आया। लेकिन परिवार बँट जाने पर माँँ-पिताजी का यहाँ मन नहीे लगा। और मेरे बच्चे और पत्नि भी पुराने मकाने में नहीे रहना चाहते थे। इसलिए हम नये घर में रहने लगे। क्योंकि मैं व्यापार के सिलसिले में ज्यादातर शहर से बाहर रहता हँू। और मेरे बच्चे भी अभी छोटे हैं। तो पीछे से देखभाल करने वाला कोई नहीे हैं। इसलिए मैंनें ही अपने दोंस्तों से कहकर यह अफवाह फैलाई थी। जिससे कोई पीछे से मकान पर कब्जा न कर ले। आप को घर देते समय भी मुझे यही डर था। इसलिए मैंनें आप से भी यही कहा था।

                                 लेकिन आप भले लोग है। चिन्ता न करें। किराये की कोई बात नहीं। जब आप की स्थिति ठीक हो तब दे देना। और आप जब तक चाहे यहाँ रह सकते हैं। वैसे मैं यह मकान बेचना चाहता हँू। यदि आप चाहे तो मैं आपको बाजार मूल्य से कम दामों में भी यह मकान बेचने को तैयार हँू। नित्या के पिता- नहीं-2 हमारी स्थिति इतनी नहीं हैं। मकान मालिक- ठीक है। लेकिन विचार हो तो बता देना। अच्छा अब मैं चलता हँू। यह कहकर मकान मालिक चला गया।

                                     कुछ दिनों में नित्या के पिता के स्वास्थ्य में धीरे-2 सुधार होने लगा। चूँकि दुकान तो ठप्प हो चुकी थी। इसलिए अब फिर से परिवार के पोषण की समस्या सामने थी। नित्या के पिता को अपने भाईयों का कोई सहारा नहीे था। जबकि उनका का काम-धन्धा सही चल रहा था। हाँलाकि उन्होंनें शुरूआत में अपने बडे. भाईयों की मदद की थी। व्यापार शुरू करने में। लेकिन अव्छी बात यह थी कि अब उनकी थोडी जान-पहचान हो गई थी। लोग उन्हें जानने लगे थे। किसी ने सलाह दी- और काफी सोच-विचार के बाद नित्या के पिता ने भी फलों का व्यापार शुरू करने का निर्णय किया।

Hospital with Market

Fruit's  Shop

                                        मकान-मालिक की जमानत पर उन्हें  MARKET में सरकारी अस्पताल के पास एक दुकान किराये पर मिल गई। कुछ पैसे उधार लेकर नित्या के पिता ने काम शुरू कर दिया। यहाँ भी किस्मत ने उनका साथ दिया। काम अव्छा चल निकला। साथ ही अब सरकारी अस्पताल के सभी डाॅ0 व अन्य स्टाफ भी उन्हें जानने लगे थे। सभी डाॅ0 उनके यहाँ से ही फल खरीदते थे। चूँकि डाॅ0 काॅलोनी उनके घर के रास्ते में पडती थी। इसलिए अक्सर वे घर तक डिलवरी दे देते थे। इससे उनकी साख अच्छी बन गई थी। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ0 जैन साहब तो उनके अच्छे मिन्न बन गये थे। अक्सर उनका एक-दूसरे के घर आना-जाना होता था

Products

Happy Family
 काम अच्छा चलने से घर की आर्थिक स्थिति अब सुघरने लगी थी। और कर्ज भी चुक गया था। नित्या अब दस साल की हो चुकी थी। और उसके एक छोटी बहन और भाई भी हो चुके थे। वह अपने सभी भाई-बहनों का अच्छे से ख्याल रखती थी। घर क काम में अपनी माँ का हाथ भी बटाँती। रान्नि में वह अपने दादा-दादी के पास ही विश्राम करती थी। बचपन  से ही उसकी दादी उसे अच्छी-2 कहानियाँ और भूत-भविष्य-वर्तमान की ज्ञानवर्धक बातों की शिक्षा दिया करती थी। अपने दिल और दिमाग में उसने उन  सब बातों को आत्मसात कर लिया था। साथ ही वह शिक्षा में भी दिन प्रतिदिन अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। उसकी सभी शिक्षिकायें उसे बहुत पसन्द करती थी। इसलिए वे उसे हर साल एक कक्षा ऊपर एडमिशन देने लगी। नित्या ने भी उन्हें निराश नहीं किया।

                              
                              अब घर की परिस्थिति अनुकूल होती दिख रही थी। कि अचानक एक दिन फिर से नित्या के पिता दुबारा बीमार हो गये। उसके दादा जी जल्दी से जाकर डाॅ0 जैन साहब को बुला लाये। चैकअप के बाद उन्होंनें बताया कि अधिक शारीरिक श्रम के कारण उनकी तबियत खराब हुई हैं। पहले भी शायद इसी कारण से ये बीमार हुए थे। नित्या के दादा ने कहा- आपने सही समझा डाॅ0 साहब। दरअसलए नित्या के पापा को इतनी मेहनत करने की आदत नहीं हैं।  कलकत्ता में हमारा खुद का अच्छा-खासा कारोबार था। मैं और इसके दोंनों बडे. भाई व कर्मचारी ही सारा काम देखते थे | 

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Doctor Advise To DADA ji
                                  लेकिन अब यहाँ सारा काम इसे खुद ही करना पडता हैं। क्योंकि मैं इस उम्र में इतनी मेहनत नहीे कर सकता और मेरे दोंनों बडे बेटे अलग रहते हैं। इसलिए यह बीमार रहने लगा हैं। डाॅ0 साहब-चलिए। कोई नहीे। जिन्दगी में उतार-चढाव तो चलते रहते हैं। अब आप इनका ध्यान रखिए। और चिन्ता न करें। किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो कहने से हिचकिचाईयगा नहीे।  ठीक हैं। अब मैं चलता हँू। डाॅ0 साहब ने पर्ची पर कुछ दवायें लिखी और समय से दवा लेने व आराम करने की सलाह दी। साथ ही ज्यादा परेशानी होने पर अस्पताल में दिखाने की हिदायत देकर वे चले गये

      

            नित्या के पिता ने फिर से बिस्तर पकड लिया था। घर की स्थिति फिर से बिगडने लगी। लेकिन अब मदद करने वाला भी कोई नहीं था। नित्या के दोंनों ताऊ अपनी घर-ग्रहस्थी में ही मग्न थे। उन्हें अपने छोटे भाई की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं था। जबकि उनके भाईयों का परिवार छोटा था और उनके भाई व भतीजे सभी कमाने वाले थे। मदद करना तो दूर उल्टे वे तो मौका ढूढँते रहते थे नित्या के पिता को ताना देने और नीचा दिखाने का। जबकि उनकी इस स्थिति के जिम्मेदार उसके ताऊ ही थे। नित्या के पिता की बीमारी दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही थी। 

                                       काम-धन्धा बन्द था। वैसे भी फलों का व्यापार तो रोज कमाओएरोज खाओ वाला था। परिवार बढ रहा था और कमाने वाले थे अकेले नित्या के पिता। वैसे इस बार इलाज सरकारी अस्पताल में होने से दवा व बीमारी के अन्य खर्चों में राहत थी। लेकिन राशन व घर के अन्य खर्चों में जो भी बचत थी वो सारी जमा पूँजी खर्च हो चुकी थी। 2 महीने में ही घर के  हालात बद से बदतर होने लगे। ऐसे में एक दिन मजबूर हो कर  नित्या के दादा जीए नित्या को लेकर अपने दोंनों बडे बेटों के पास मदद माँगने पहँुचे। लेकिन मदद करने कि उन्होंनें अपने पिता को काफी खरी-खोटी और कोई मदद भी नहीं की। नित्या के दादा जी को खाली ही लौटना पडा।



                                       नित्या के दिल और दिमाग पर इसका काफी गहरा असर हुआ। इधर घर में सभी चिन्तित थे। कि अब क्या करें। उसके दादा-दादी काम सम्भाल नही सकते थे। नित्या की माँ उसके पिता और घर की देखभाल में व्यस्त रहती थी । और वैसे भी उन्हें व्यापार की कोई समझ नही थी। नित्या के पिता की हालत में कुछ खास सुधार नही था। क्योंकि चिन्ता ने बीमारी को और बडा दिया था। सब इसी चिन्ता में थे कि अब आगे क्या होगा।

What Next
क्रमश:-

अगले भाग में:-

                        नित्या के परिवार के हालात कैसे ठीक हुए। क्या किसी ने उनकी मदद की ? नित्या पर इन सब का क्या असर हुआ। कैसे उसका जीवन प्रभावित हुआ। उसने क्या निर्णय लिया और उसे किन परेशानियों का सामना करना पडा। कैसे उसने अपने परिवार की जिम्मेदारी ली। और परिवार को सम्भाला। उसकी शिक्षा का क्या हुआ। उसके परिवार ने उसका साथ दिया या नही। उस नन्हीं सी जान को किन संघर्षों और कष्टों का सामना करना पडा। और उसके जीवन ने आगे किस तरह परिवर्तन आया। क्या उसका बचपन कहीं खो गया या सम्भाल कर रखा था उसने अपने बचपन को। अपने जीवन में क्या वो जी पाई दिल दिमाग से  अपना बचपन । या जीवन के संघर्ष में नष्ट होे गया उसका बचपन।    

First Part:-

          

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सोमवार, 7 दिसंबर 2020

A Day of Friendship

  / एक दिन दोस्ती का                                                                      

                                                                            भाग 2

पहले भाग में आपने पढा :-

कि कैसे मानव और मनन आपस में मिले। मानव फिलहाल बेरोजगार हैं और मनन एक शाॅप चलाता हैं। दोंनों एक.दूसरे को परिचय देते है। मानव अपने घर चला जाता है और मनन अपनी शाॅप पर। शाॅप पर उसे श्रुति मिलती है। जो अपनी शादी छोड कर आई है। श्रुति मनन को अपनी कहानी बताती हैं कि रोहन जो उसके बचपन का दोस्त और मंगेतर था। शादी के ऐन वक्त भाग जाता हैं। और हेल्प करने को कहती हैं।

आगे की कहानी :-

 कहानी सुनाते समय श्रुति की आॅखे  भर आई। मनन ने उसे रूमाल दिया। आॅंसू पोंछते हुये श्रुति बोली:-  मैं एकदम Shocked थी ! कि मेरे बचपन का दोस्त मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता हैं। बचपन से जो हर छोटी से छोटी बात मुझसे Share करता था। उसने इतनी बडी बात मुझसे छुपाई। और बताया भी तो ऐसे वक्त पर जब लाइफ का सबसे  Important Moment  सामने था। शादी कोई हॅसी.खेल थोडी हैं। लेकिन रोहन ने शादी को मजाक बना दिया था। मुझे उससे मिलना था। तो पापा से इजाजत लेकर मैं Airport के रवाना हो गई। Airport पहुॅच कर मैंनें पता किया तो रोहन कि Flight में अभी टाइम था। रोहन Airport Lounge मे मुझे मिल गया। 


          मुझे देखकर रोहन चैंक गया। तुम यहाॅ ? श्रुति:- तुमने क्या सोचा था। बिना मिले ही चले जाओगे। बचपन की दोस्ती, प्यार, सब भुला दिया तुमने, किसी का कोई मोल नही तुम्हारे लिए। रोहन:- मैं जानता हॅू ! मुझसे बहुत बडी गलती हुई हैं। I Apologize. मैं तुम्हें सब बताना चाहता था। लेकिन कभी हिम्मत नही जुटा सका। MBA के बाद जिस कम्पनी में मुझे जाॅब मिला उसी में वो भी पहले से काम करती थी । वही हम पहली बार मिले। जल्द ही हम दोस्त बन गये और साथ काम करते-2 पता ही नही कब हम एक.दूसरे के बहुत करीब आ गये। हम एक.दूसरे को पसंद करने लगे। हमे एक.दूसरे की आदत सी हो गई थी। Like made for each-other. और एक दिन उसके Parents ने शादी के लिए पूछा ! तो मैं मना नही कर पाया। और हमनें शादी कर ली ।

          श्रुति:- तुमने उसे हमारे बारे में बताया। रोहन:- बस यही की हम अच्छे दोस्त हैं। श्रुति:- हमारी सगाई और शादी के बारे में। रोहन:- बताना चाहता था पर कभी कह नही पाया। श्रुति:- मतलब तुमने हम दोंनों को धोखे में रखा। इतना कहते ही रोहन गुस्से से बोला! मैंनें किसी को धोखा नही दिया। मेरे भी कुछ सपने थे। मैं भी Life में कुछ बनना चाहता था। यहाॅ रहकर मैं Life को Spoil नहीं करना चाहता था। मुझे Abroad  जाना था। पापा ने कहा. श्रुति से शादी कर लो। मैंनें कहा. मुझे कुछ बनना चाहता हॅू। अभी बहुत कुछ करना चाहता हॅू। उन्होंनें कहा. सगाई ही कर लो। मैं मान गया। मुझे बस यहाॅ से जाना था। श्रुति. मतलब तुमने मेरा इस्तेमाल किया। मेरे प्यार और दोस्ती को एक सीढी की तरह Use किया। तुम तो वाकई एक  Perfect Businessman हो। 

            रोहन. मैं यह सब नहीं करना चाहता था। तुम्हें कोई धोखा नहीं देना चाहता था। लेकिन मेरे पास कोई Option नहीं था। मैंनें तुम्हें कई बार बताने की कोशिश की पर कभी कह नही पाया। इसलिए तुमसे बिना मिले ही जा रहा था। मैंनें यह सब अभी तक पापा.मम्मी को भी नहीं बताया हैं। पापा ने मुझे मिलने के बहाने से बुलाया था। यहाॅ आने पर मुझे शादी के बारे में पता चला।  वो मुझे Surprise देना चाहते थे मगर मैं Shocked था। क्योंकि मैं यह शादी नहीं कर सकता था। 

          अगर पहले से पता होता तो मैं आता ही नही। इसलिए मैं जा रहा हॅू। मेरी वजह से तुम्हें इस Situation और Problem का सामना करना पडा। तुम्हारा दिल टूट गया। इसके लिए मैं जितनी बार भी Sorry कहॅू कम हैं। मेरा ऐसा कोई इरादा नही था। मैं तुम्हारी Life को  Disturbed नहीं करना चाहता था। हम हमेशा अच्छे दोस्त रहेंगें अगर तुम समझो तो। शायद मैं कभी तुम्हारे किसी काम आ सकॅू।इतने में रोहन की  Flight Announce हो गई। रोहन. अब मुझे जाना होगा। मुझे भूल जाना। हो सके तो मुझे माफ कर देना। इतना कहते हुए रोहन चला गया।

          श्रुति. मैं रातभर Airport Lounge में बैठी रही। घर जाने का मन नही था। पापा.मम्मी की बहुत Calls आ रही थी पर मैंनें बात नही की। सुबह Airport से बाहर आ कर टैक्सी ली । टैक्सी ड्राईवर- कहाँ  जाना हैं। मैंनें कहाः- आप चलिए तो मैं बताती हँू। टैक्सी चल दी। लगभग 1 घंटे तक टैक्सी वाला चलता रहा। ड्राईवर- आपको जाना कहाँ हैं। मैंनें कहा- मुझे आगे कहीं उतार दे। ड्राईवर- आप Address  भूल गई हैं या पहली बार आई हैं। कोई परेशानी हैं तो बताईए। मैंनें कहा- कोई परेशानी नहीं हैं। आप मुझे यही उतार दीजिये। ड्राईवर ने टैक्सी रोक दी- लेकिन मेरे पास किराये के पैसे नहीं थे।

          ड्राईवर ने कहा- अगर आप मुझे अपना Address दे तो मैं आप घर छोड देता हँू और आप मुझे पैसे भी दे देना। मैंनें कुछ नहीं कहा। ड्राईवर बोला- ठीक हैं। आप नहीं बताना चाहती तो आपकी मर्जी। आप यहाँ उतर जाये। यह यहाँ पर मनन भैया की Shop हैं। अभी थोडी देर में वो आते ही होंगें। हो सकता हैं वो आपकी कुछ मदद कर सके। उनसे कहना- मैंनें आपको यहाँ छोडा हैं। विकास नाम का लडका उनके यहाँ  Tuition पढता हैं। मैं उसका पापा हूँ। मैंनें पूछा- आपका किराया। ड्राईवर- कोई बात नहीं बाद में फिर कभी दे देना। मैंनें उसे अपना कंगन देना चाहा पर उसने मना कर दिया। और मुझे यहाँ उतार कर वो चला गया। इस तरह मैं यहाँ पर आई।

            मनन- ok! कोई बात नहीं उसे पैसे मैं दे दूगां।  अब कहिए- मैं आपकी कैसे और क्या मदद कर सकता हूँ। श्रुति- मेरा MBBS  पूरा होने में अभी एक साल बाकी है। मैं अब और अपने Parents पर बोझ नहीं डालना चाहती। पहले ही मेरी पढाई और शादी की तैयारी पर वो काफी खर्चा कर चुके हैं। मैं  Self  कुछ करना चाहती हूँ। MBBS  पूरा करने के साथ-2 मैं Job करना चाहती हूँ। ताकि मैं अपना और अपनी पढाई का खर्चा खुद ही वहन कर सकूं। पर अभी Tension के कारण मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं। बस इस बारे में ही आप से थोडी Help और Guidance  चाहिये। 

             मनन- वैसे आपकी मर्जी। मुझसे जो भी मदद होगी मैं जरूर करूंगा। लेकिन मेरी राय हैं- आपको अपने घर लौट जाना चाहिए। आपके Parents तो आपसे नाराज हैं ही नहीं ना। फिर आप क्यों उनसे दूर रहना चाहती हैं। आपको इस तरह देखकर वो और ज्यादा परेशान होंगें। अपनी बेटी को ऐसी स्थिति में देखकर क्या उन्हें अच्छा लगेगा ?  श्रुति- आपकी बात सही हैं। लेकिन उनकी खुशी के लिए ही मैं यह सब करना चाहती हूँ। मेरी एक छोटी बहन भी हैं। अभी उसकी पढाई और शादी की जिम्मेदारी भी पापा पर हैं। मेरा ऐसा करने से मैं अपनी और Family दोंनों की Help कर पाऊँगी। और Family साथ रहकर मैं उन्हें रोज-2  Guilty  फील नहीं करवाना चाहती। 

              मनन- ठीक है। चलिए पहले आप Fresh हो कर Change कर लिजिये। और फिर कुछ Breakfast या  Lunch जो भी आप लेना चाहे। लेकिन इसके लिए आपको मेरे घर चलना होगा। अगर आप ठीक समझे तो। मैं अपने भैया-भाभी के साथ रहता हूँ। श्रुति- मुझे आप पर पूरा विश्वास हैं। और वैसे भी अब तो आप को ही मेरी मदद करनी हैं। जी चलिए। मनन ने अपना  Shop Lock  किया। और दोंनों मनन के घर चल दिये। घर आ कर मनन ने श्रुति को अपनी भाभी और दीक्षा से मिलवाया। श्रुति को दीक्षा अपने साथ अपने रूम में ले गई। दीक्षा ने श्रुति को अपने कपडे दिये। मनन ने अपनी भाभी अवनी को श्रुति की पूरी कहानी बता दी।  अवनी  Breakfast बनाने लगी। मनन ने मानव को फोन किया और मिलने बुलाया। इतने में  Fresh  और  Change के बाद श्रुति दीक्षा के साथ आई। Breakfast के बाद मनन ने अपनी भाभी से कहा- श्रुति को किसी से मिलाना हैं। तो हम मिलकर आते हैं। इजाजत लेकर दोंनों चल दिये। रास्ते में मनन ने श्रुति को मानव के बारे में बताया। 



क्रमश:-


आगे के भाग में:-

मनन और मानव ने श्रुति की मदद कैसे की। आगे जानेंगें:- मनन और मानव की कहानी। श्रुति ने अपना MBBS पूरा किया या नहीं। मानव की Job का क्या हुआ। मानव मनन और श्रुति की दोस्ती के बारे में।  


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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

A Day of Friendship

    / एक दिन दोस्ती का

                                                                                श्री

                                                                         

प्रस्तावना 

यह कहानी हैं प्याार की इकरार की किस्मत की भरोसे की ।


कहानी

उस दिन मानव बहुत ज्यादा ही परेशान था। आज भी सारा दिन इन्टरव्यू देने में ही बीत गया। थका.हारा रात को अपने स्कूटर पर घर लौट रहा था कि अचानक किसी कारण से उसका स्कूटर फिसलकर एक घर के अन्दर जा घुसा। और वह बेहोश हो गया। चूकिं रात ज्यादा थी और घर से सभी लोग सो चुके थे। इसलिये कोई बाहर नही आया। सुबह जब ऑख खुली उसने खुद को किसी अनजान घर में पाया। पहले खुद को सम्भाला फिर स्कूटर को खडा किया। उसे किसी तरह की कोई चोट नही लगी थी लेकिन वो थकान महसूस कर रहा था इसलिए वो एक दीवार के सहारे बैठ गया। तब ही उसे कुछ बच्चों की आवाजें सुनाई दी। आवाजें दीवार के ऊपर बनी खिडकी में से आ रही थी। 



उसने देखा 2 बच्चे रसोईघर में आपस में मिठाई खाने के लिए झगड रहे थे। । एक का नाम श्याम 10 साल काए दूसरे का नाम अक्षर 7 साल का। तब ही वहॉ पर दीक्षा आई जो अक्षर की मॉ थी और श्याम की मौसी। दोंनों अपनी ही जिद पर अडे थे। दीक्षा ने श्याम को समझाया कि वो बडा है और उसकी मॉ अवनी भी तो अक्षर को तुमसे ज्यादा प्यार करती हैं तो तुम्हें अक्षर को पहले मिठाई खाने देनी चाहिये और अक्षर को समझाया कि बडे भाई से लडते नही है बडों का कहना मानते हैं। ठीक हैं। ऐसा कह कर दोंनों ने एक.दूसरे को गले लगाया और बॉट कर मिठाई खाई।


 ये सब मानव खिडकी से देख रहा था तब ही एक आवाज ने उसका ध्यान खींचाए क्यों भई सुबह.2 आ गये टयूशन पढने । सालभर तो पढाई करते नही और Exam के समय शार्टकट ढूढते हो। 

मानव ने कहा। जी मैं टयूशन पढने नहीं आया ओर उसने रात की सारी बात बता दी । ओह। सॉरी मेरा नाम मनन हैं। मानव ने अपना नाम बताया। मनन बोला. मुझे लगा तुम टयूशन पढने आये हो। मानव.तुम टीचर हो। मनन.नही प्राइवेट टयूशन पढता हूॅ। पार्ट.टाइम  Insurance  का काम करता हूॅ और मेरी एक  Photocopy & Cyber Cafe  की शॉप हैं। और तुम। मानव बोला. अभी तो बेरोजगार हूॅं पिछले कुछ महीनों से। पॉच साल से अच्छी खासी जॉब थी। लेकिन कोविड की वजह से जॉब चली गई। अब 5.6 महीने से जॉब सर्च कर रहा हूॅं। कल भी मैं  Interview देकर वापस घर लौट रहा था। तब ही यह सब हुआ। वा अब मैं चलता हूॅ। दोंनों ने  Mob.No.  exchange  किये। मानव अपने घर चल दिया। मनन अपनी शॉप पर । 



मनन की शॉप एक कॉलोनी में बने पम्प हाऊस के एक कमरे में थी। जिसके बाहर एक छोटा सा बरामदा था। जब मनन शॉप पर पहुॅचा तो देखा वहॉ एक लडकी बैठी थी। दुल्हन बनी उस लडकी को देख मनन चौंका। उसने पूछा. आप कौन और यहॉ कैसे।  उसने अपना नाम श्रुति बताया। श्रुति ने कहा. वो अपनी शादी से भाग कर आई है। Please Help me ! मनन असमंजस में था कि वो क्या करे। उसकी स्थिति को भॉप कर श्रुति ने कहा। Don't worried ! आप को कोई परेशानी नहीं होगी। मनन शॉप का दरवाजा खोलकर कुर्सी ले कर आया। दोंनों बैठे। मनन बोला. कहिए मैं आप की क्या मदद कर सकता हूॅ। 

श्रुति बोली- मैं एक मिडिल क्लास फैमिलि से हूॅ। मेरे पापा एक प्राईवेट स्कूल में अध्यापक हैं। मैंनें भी अपनी Schooling  उसी स्कूल से की हैं। स्कूल में मेरे साथ रोहन भी पढता था। We had best friend & our friendship was famous in campus.  रोहन के पापा एक  Businessmen  हैं और मेरे पापा के Childhood friend भी । इसलिए Graduation के बाद हमारी  Family  ने हम दोंनों की सगाई तय कर दी। Because we like each-other  इसलिए हम भी सहमत थे। 





सगाई के बाद रोहन  MBA  के लिए  Abroad  चला गया और मैं अपनी डॉ0 की पढाई में  Busy  हो गई। हम लगातार एक.दूसरे में सम्पर्क में थे। इसी तरह 4 साल हो गये । MBA  पूरा करने के बाद रोहन की वहीं एक अच्छी कम्पनी में जॉब लग गई। मेरा   MBBS  पूरा होने में अभी एक साल बाकी था। एक दिन अंकल घर आये और पापा से मेरे और रोहन की शादी की बात की । पापा ने  MBBS  पूरा होने तक रुकने को कहा। अंकल ने कहा. शादी के बाद भी पूरा कर सकती है। श्रुति मेरी भी बेटी ही हैं बस बहू बनकर अपने इस घर से अपने उस घर जा रही हैं। पापा राजी हो गये। अकंल ने रोहन को भी बुला लिया।




शादी का दिन भी आ गया। हम सभी बारात का वेट कर रहे थे। तभी अकंल एक खत लेकर पापा के पास आये। मुझे माफ कर दे यार। कहते हुए पापा को खत थमा दिया। खत पर मेरा नाम लिखा था। पापा ने खत मुझे दिया । 

 

खत में लिखा था. 

 Shruti,    

          I am sorry मैं तुम्हें बताना चाहता था। लेकिन कह नही पा रहा था। । Abroad  में  Job  करते समय मुझे Jenny से प्यार हो गया। वो मेरे ही Office में थी । साथ में काम करते हुए हम एक.दूसरे को पसंद करने लगे । और हमने विवाह कर लिया । पापा से कहने की हिम्मत नहीं थी । इसलिए तुम्हें खत के जरिये बता रहा हूॅं । We are best friend but I can't face you. So, I am Sorry again  की इस वक्त मैं तुम्हें यह बता रहा हूॅं । Hope you Understood me.  मैं आज रात की Flight से जा रहा हूॅं ।

                                                                                                              

                                                                                                                Rohan


क्रमश:-

दूसरे भाग में 

मनन ने श्रुति की मदद कैसे की । क्या उसने मानव की हेल्प ली । मानवए मनन और श्रुति आपस में दोस्त बने ?


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